1> || হরীতকী ||
2>কারিপাতার গুণা গুণ ::---
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1> || হরীতকী ||
হৃদরোগ-জন্ডিস ও আমাশয় নিরাময় করে হরিতকি
একুশে টেলিভিশন
ভেষজ চিকৎসকরা হরিতকি গাছকে মায়ের সঙ্গে তুলনা করে থাকেন। তারা বলেন, মানুষের কাছে এ বৃক্ষ মায়ের মতোই আপন। মানুষের শরীরে সংক্রমিত প্রায় সব রোগ-ব্যাধির ওষুধ হিসেবে হরিতকির ব্যবহার রয়েছে। সব রোগ হরণ করে বলেই প্রাচীন শাস্ত্রকাররা এর নাম দিয়েছেন হরিতকি।
১) অর্শ রোগে হরিতকি চূর্ণ তিন থেকে পাঁচ গ্রাম পরিমাণ ঘোলের সঙ্গে একটু লবণ মিশিয়ে খেলে সেরে যাবে।
২) রক্তার্শে আখের গুড়ের সঙ্গে হরিতকি গুঁড়া মিশিয়ে খেলে কয়েকদিনের মধ্যেই সুফল পাওয়া যায়।
৩) চোখের রোগের ক্ষেত্রে হরিতকি ছেঁচে পানিতে ভিজিয়ে সেই পানি দিয়ে চোখ ধুতে হবে।
৪) পিত্ত বেদনায় সামান্য গাওয়া ঘিয়ের সঙ্গে হরিতকি গুঁড়া সেবন করতে হয়।
৫) গলার স্বর বসে গেলে মুথা ও হরিতকি চূর্ণ মধুর সঙ্গে বেটে অথবা যোয়ানের সঙ্গে পান করলে স্বর স্বাভাবিক হয়।
৬) হরিতকি ফল হৃদরোগ, বদহজম, আমাশয়, জন্ডিস এবং ঋতুস্রাবের ব্যথায় খাওয়ানো হয়।
৭) ফলের রস জ্বর, কাশি, হাঁপানি, পেট ফাঁপা, ঢেকুর উঠা, বর্ধিত যকৃত ও প্লীহা, বাতরোগ ও মূত্রনালীর অসুখেও বিশেষ উপকারী।
৮) কাঁচা ফল রেচক হিসেবে কাজ করে।
৯) আধুনিক ভেষজ চিকৎসকরা ফুঁসফুঁস ও শ্বাসনালীঘটিত রোগে হরিতকি বহুল ব্যবহার করে থাকেন। কাশি ও শ্বাসকষ্টে হরিতকি খুবই কর্যকর।
১০) এছাড়া, ঘন ঘন পানির তৃষ্ণা কিংবা বমি বমি ভাব কাটাতেও হরিতকি ব্যবহৃত হয়।
১১) ত্রিফলা অর্থাৎ আমলকি, হরিতকি ও বহেরা এর প্রতিটির সমপরিমাণ গুঁড়ার শরবত কোলেস্টেরল কমাবার অর্থাৎ প্রেসার বা রক্তচাপ কমাবার মহৌষধ। এক ওষুধ গবেষক দলের মতে, আধুনিক যে কোন এ্যালোপ্যাথিক ঔষধের তুলনায় ত্রিফলা কোলেস্টেরল কমাবার ক্ষেত্রে অনেক বেশি ফলপ্রসূ।
পরিচিতি : মধ্যম থেকে বৃহদাকারের পত্রমোচী বৃক্ষ। উচ্চতায় ২০-৩০ মিটার হয়। বাকল গাঢ় বাদামী। বাকলে লম্বা ফাটল থাকে। পাতা লম্বাকৃতির, ৭-২০ সে.মি. হয়। ফুল সাদা বা হলুদ হয় এবং স্পইকে ঝুলন্ত অবস্থায় থাকে। ফল ড্রপ, ঝুলন্ত, চার সে.মি লম্বা সবুজাভ হয়। কাঠের রং ঘন বেগুনি, খুব শক্ত, ভারী ও মাঝারি আকারের টেকসই।
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हरड़ ::--( Myrobalan. )
आयुर्वेद में तो इसके कई चमत्कारिक फायदे बताए गए हैं। दरअसल, इसे त्रिदोष नाशक औषधि माना जाता है। यह पित्त के संतुलन को तो बनाए रखता ही है, साथ ही यह कफ और वात संतुलन को भी बनाकर रखता है। कई बीमारियों में इसे बेहद ही फायदेमंद माना जाता है, जिसमें पाचन से जुड़ी समस्याएं भी शामिल हैं।
हरड़ के चमत्कारिक फायदे, पाचन शक्ति बढ़ाने से लेकर बवासीर तक में दिला सकता है राहत
हरड़ के फायदे
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हरड़ के फायदे - फोटो : Pixabay
हरड़, जिसे हरीतकी भी कहा जाता है, एक प्रसिद्ध जड़ी-बूटी है। यह त्रिफला में पाए जाने वाले तीन फलों में से एक है। भारत में इसका इस्तेमाल घरेलू नुस्खों के तौर पर खूब किया जाता है। आयुर्वेद में तो इसके कई चमत्कारिक फायदे बताए गए हैं। दरअसल, इसे त्रिदोष नाशक औषधि माना जाता है। यह पित्त के संतुलन को तो बनाए रखता ही है, साथ ही यह कफ और वात संतुलन को भी बनाकर रखता है। कई बीमारियों में इसे बेहद ही फायदेमंद माना जाता है, जिसमें पाचन से जुड़ी समस्याएं भी शामिल हैं। आइए जानते हैं इसके सेवन से होने वाले जबरदस्त फायदों के बारे में...
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हरड़ के फायदे
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
नियमित रूप से हरड़ का सेवन आपके पाचन तंत्र को सुधार सकता है। इसे गैस, अपच और कब्ज जैसी पेट की कई समस्याओं में कारगर माना गया है। एक कप गर्म पानी में 1-3 ग्राम हरड़ का सेवन आपको पाचन संबंधी परेशानियों में राहत दिला सकता है।
हरड़ के फायदे
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
हरड़ का सेवन उल्टी में भी राहत दिला सकता है। अगर आपको उल्टी जैसा महसूस हो रहा है तो हरड़ का सेवन कर सकते हैं। इससे यह समस्या दूर हो सकती है। इसके अलावा दस्त की समस्या में भी हरड़ बेहद फायदेमंद होता है। आप दस्त होने पर हरड़ की चटनी बनाकर खा सकते हैं। इससे राहत मिलेगी।
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हरड़ के फायदे
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
बवासीर की समस्या में भी हरड़ का इस्तेमाल फायदेमंद हो सकता है। यह बवासीर में होने वाले दर्द को कम करने और रक्तस्राव को रोकने में मदद करता है। नियमित रूप से इसका इस्तेमाल आसानी से मल त्यागने में उपयोगी हो सकता है।
हरड़ के फायदे
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
वजन घटाने में भी हरड़ काफी लाभदायक माना जाता है। इसके अलावा दिल के रोगों से बचने के लिए नियमित रूप से इसका सेवन करें। ब्लड शुगर का स्तर भी नियमित बनाए रखने के लिए हरड़ का सेवन किया जा सकता है। इसका उपयोग सिर दर्द और बदन दर्द आदि में भी किया जाता है।
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हरड़ एक अत्यंत लाभकारी औषधि है। यह शरीर के 100 से अधिक रोगों का नाश करती है। आइए जानें इसके कुछ खास फायदे और नुस्खे...
हरड़ का काढ़ा त्वचा संबंधी एलर्जी में लाभकारी है। हरड़ के फल को पानी में उबालकर काढ़ा बनाएं और इसका सेवन दिन में दो बार नियमित रूप से करने पर जल्द आराम मिलता है। एलर्जी से प्रभावित भाग की धुलाई भी इस काढ़े से की जा सकती है।
इसी तरह, फंगल एलर्जी या संक्रमण होने पर हरड़ के फल और हल्दी से तैयार लेप प्रभावित भाग पर दिन में दो बार लगाएं, त्वचा के पूरी तरह सामान्य होने तक इस लेप का इस्तेमाल जारी रखें।
मुंह में सूजन::---
मुंह में सूजन होने पर हरड़ के गरारे करने से फायदा मिलता है। हरड़ का लेप पतले छाछ के साथ मिलाकर गरारे करने से मसूढ़ों की सूजन में भी आराम मिलता है।
दांत दुखने से::--
इसी तरह, हरड़ का चूर्ण दुखते दांत पर लगाने से भी तकलीफ कम होती है। हरड़ स्वास्थ्यवर्धक टॉनिक होता है जिसके प्रयोग से बाल काले, चमकीले और आकर्षक दिखते हैं।
हरड़ के फल को नारियल तेल में उबालकर (हरड़ पूरी तरह घुलने तक) लेप बनाएँ और इसे बालों में लगाएं या फिर प्रतिदिन 3-5 ग्राम हरड़ पावडर एक गिलास पानी के साथ सेवन करें।
हरड़ का गूदा कब्ज से राहत दिलाने में भी गुणकारी होता है। इस गूदे को चुटकीभर नमक के साथ खाएं या फिर 1/2 ग्राम लौंग अथवा दालचीनी के साथ इसका सेवन करें।
अपच अथवा पेट संबंधी अन्य गड़बड़ियों में हरड़ के गूदे को शहद, लौंग और दालचीनी के साथ लेने पर आराम मिलता है।
भूने हरड़ का चूर्ण सेवन करने से बवासीर में लाभ मिलता है। हरड़ के ताजे फलों को रेंडी के तेल में (कैस्टर आइल) में में सुनहरा होने तक भूने। ठंडा होने पर इसे पीसकर चूर्ण बना लें और किसी ठंडी जगह पर रखें लेकिन फ्रिज में ना रखें। आधा चम्मच चूर्ण रात में सोते समय लेने से सबेरे पेट साफ रहता है।
हरड़ का फल याददाश्त को भी बढ़ाता है, मधुमेह और कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित रखता है। यह ह्रदय विकारों में भी लाभप्रद है।
हरड़ का ज्यूस शरीर में ताजगी लाता है। स्नायु तंत्र को शांत रखता है। इसके रस से पाचन तंत्र की शुद्धि होती है।
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2>কারিপাতার গুণা গুণ ::---
বিশিষ্ট আয়ুর্বেদিক চিকিৎসকের মতামত
দক্ষিণ ভারতীয় রান্নায় ব্যবহৃত মশলার মধ্যে কারিপাতা অন্যতম।
ভারত, শ্রীলঙ্কা, বাংলাদেশের যত্রতত্র এই গাছ দেখতে পাওয়া যায়। ছোট বৃক্ষ জাতীয় গাছ। অনেক দিন বাঁচে। দেখতে অনেকটা নিমপাতার মতো। তবে পাতা গুলি নিমপাতার মতন খাঁজ কাটা নয়।
গাছটির বৈজ্ঞানিক নাম----
"মুররায়া কোয়েনিগি" ।
একে ‘মিঠা নিম"ও বলা হয়।
রান্নাতে স্বাদ ও গন্ধ বাড়াতে এর প্রচলন বহু যুগ ধরে। আয়ুর্বেদে একে কৃষ্ণ নিম্ব বা গিরি নিম্ব বলা হয়েছে।
মাংসপেশি, অস্থিসন্ধির সমস্যায় তথা সাপের বিষের প্রতিষেধক হিসেবে এর উল্লেখ পাওয়া যায়।
এটি দেহে বায়ু, পিত্ত, কফের ভারসাম্য বজায় রাখে।
তামিল শব্দ ‘কড়ি পট্ট’ থেকে কারিপাতা নাম হয়েছে।
কারিপাতার গুণ-----
এর পাতা, বাকল, শিকড়, ফল সবই কাজে লাগে। মাথার চুল থেকে পায়ের নখ পর্যন্ত শরীরের প্রতিটি অঙ্গের কার্যক্ষমতা বাড়াতে এর জুড়ি মেলা ভার।
একাধিক মারণ রোগ দূরে তো রাখেই, সুন্দর আকর্ষণীয় চেহারা পেতেও সাহায্য করে।
এছাড়াও নানান গুণে সমৃদ্ধ এই কারীপাতা।
1> এর অ্যান্টি-অক্সিড্যান্ট, অ্যান্টি-ব্যাকটেরিয়াল ও অ্যান্টি-ক্যান্সারাস গুণ আজ প্রমাণিত।
2> এর সুগন্ধ খাবারে অন্য মাত্রা এনে দেয়।
3> এতে প্রচুর বিটা ক্যারোটিন, ফলিক অ্যাসিড, ক্যালশিয়াম, আয়রন, ভিটামিন সি, বি, এ, ই রয়েছে।
4> শরীরের ক্ষতিকারক কোলেস্টেরল বা এলডিএল কমায়। উপকারী কোলেস্টেরল এইচডিএল বাড়ায়।
5> পাকস্থলীর দূষিত পদার্থ দূর করে। পাচনক্ষমতা বাড়ায়।
6> ইনসুলিনের কার্যকারিতা বাড়ায়, ডায়াবেটিস নিয়ন্ত্রণে রাখে।
7> এর আয়রন ও ফলিক অ্যাসিড অ্যানিমিয়া কমায়।
8> কারিপাতা অল্প মধু মিশিয়ে খেলে সর্দি, কাশি, সাইনুসাইটিস, নাক বন্ধ হয়ে যাওয়া থেকে মুক্তি পাওয়া যায়।
9> কারিপাতার অ্যান্টি-ক্যান্সার গুণ প্রস্টেট, রেকটাম, কোলন ক্যান্সারের আশঙ্কা কমায়। রেডিওথেরাপি ও কেমোথেরাপির ক্ষতিকর প্রভাব কমায়।
10> লিপিড প্রোফাইল ঠিক রাখে। হার্ট ভালো রাখতে সাহায্য করে।
11> নিমের বিকল্প হিসেবে কারিপাতার ডালও দাঁতন হিসেবে ব্যবহার করা যায়। এই পাতার পাউডার টুথ পাউডার হিসেবে ব্যবহার করা যায়।
12> মস্তিষ্ক সতেজ রাখতে সাহায্য করে। স্মৃতিশক্তি বাড়ায়, অ্যালজাইমার্স প্রতিরোধ করে।
13> স্ট্রেস কমাতে এর ভূমিকা রয়েছে।
14> কারিপাতার অ্যান্টি ডায়ারিয়াল গুণ আছে। বদহজম, বমিভাব কমায়। সেজন্য সামান্য মধু ও চিনি মিশিয়ে খেতে হবে অল্প পরিমাণে বারবার।
15> প্রচুর ভিটামিন এ থাকায় দৃষ্টিশক্তি বাড়াতে ও ছlনিপড়া কমাতে খুব উপকারী।
16> কারিপাতা বাটা সামান্য মধু মিশিয়ে খেলে ওজন কমে।
17> এর অ্যান্টি-অক্সিড্যান্ট গুণের জন্য জীবাণু সংক্রমণ হওয়ার আশঙ্কা কমে।
ত্বক ও চুলের রোগ বিনাশ
18> চুলের যত্নে কারিপাতার ভূমিকা সর্বজনবিদিত। দক্ষিণ ভারতীয়রা প্রায় সব খাবারে এটি ব্যবহার করে তাই তাঁরা ঘন, কালো একঢাল চুলের অধিকারী হয়।
19> চুল পড়া রোধ করে। চুলের বৃদ্ধিতে সাহায্য করে। প্রাচীনকাল থেকে চুলের স্বাস্থ্যরক্ষায় এর ব্যবহারের কথা বলা হয়েছে। কারিপাতা, নিমপাতা, মেথি, কেশুত পাতা বেটে পেস্ট করে মাথায় লাগালে চুলওঠা বন্ধ হয়।
20> অকালপক্বতা রোধ করে।
21> কারিপাতার অ্যান্টি-ফাঙ্গাল, অ্যান্টি-ব্যাকটেরিয়াল, অ্যান্টি-ইনফ্লামেটরি গুণ মাথার খুশকি, র্যাশ, ফোঁড়া, ইনফেকশন থেকে স্ক্যাল্পকে সুরক্ষিত রাখে। কারিপাতা টকদই-এ মিশিয়ে ব্যবহার করা যেতে পারে।
22> চুলের ক্ষতি সারায়। দূষণ, রোদ, হাওয়া, জল ইত্যাদির কারণে চুলের লাল হওয়া, ভেঙে যাওয়া, শুষ্ক হওয়া খুব সাধারণ সমস্যা। কারিপাতার নিয়মিত ব্যবহার এইসব সমস্যা মেটায়। ত্বকের নানা সংক্রমণ কমাতে সাহায্য করে।
বিষাক্ত পোকাকামড় কামড়ালে কারিপাতা থেঁতো করে লাগাতে হয়। এর বীজের তেল ত্বক ঠান্ডা রাখতে ব্যবহার করা হয়।
( সংগ্রহীত)
আদ্যনাথ রায় চৌধুরী
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