Wednesday, November 23, 2016

9>To SBI BELGHORIA --dt 23/11/2016



To
the Branch manager                                       Dated:-23/11/2016
SBI Belghoria (0888)
97, Feeder Road (calcutta)
Kolkata 700056

Sub--Regarding IT Deduction against the interest of FD.  Avoiding my 15H


Sir 
      I like to inform you that I  Adyanath Roy Choudhuri ,
sb c/c No; 31593997267-I am 65years old Retire person my total yearly income not more than 2lakh which I declared in 15H and I am regularly submitting the 15H against my FD A/C at your branch,
Details of my FD A/C---
FD 1>No 31780871332
2>33839022063
3>31622607350
Last 15 H submitted three times in this year (ie for the year 2016 ) 
no dt 02/04/2016, 16/05/2026, And on dt 08/11/2016
But yet I found you have deducted the Tax Rs 194/- on dt 09/11/2016
Against the interest paid for the a/c 33839022063.
l hope it is not justice.
So I shall be highly oblige if you kindly please do the needful and please look after my accounts not to deduct I.TAX

 Dated:-23rd November 2016                                Thanking you
229A, Prafullanagar                                                   Yours
Low Land                                                        Adyanath Roy Choudhuri
P.O. BELGHORIA                                                My 
kolkata 700056                                                 Sb a/c No 31593997267
MOBILE No-8017251924                                                           PAN- ABFPC 9025K
                                          ==========================
                                          ==========================
                                                                                

Thursday, November 17, 2016

7>=रुक्नणी एवं राधा



रुक्नणी एवं राधा

एक दिन रुक्मणी ने भोजन के बाद, श्री कृष्ण को दूध पीने को दिया।
दूध ज्यदा गरम होने के कारण श्री कृष्ण के हृदय में लगा और
उनके श्रीमुख से निकला-" हे राधे ! "

सुनते ही रुक्मणी बोली-
प्रभु ! ऐसा क्या है राधा जी में, जो आपकी हर साँस पर उनका ही नाम होता है ?
मैं भी तो आपसे अपार प्रेम करती हूँ...फिर भी,आप हमें नहीं पुकारते !!
श्री कृष्ण ने कहा -देवी !आप कभी राधा से मिली हैं ?और मंद मंद मुस्काने लगे...

अगले दिन रुक्मणी राधाजी से मिलने उनके महल में पहुंची ।
राधाजी के कक्ष के बाहर अत्यंत खूबसूरत स्त्री को देखा...
और,उनके मुख पर तेज होने कारण उसने सोचा कि-
ये ही राधाजी है और उनके चरण छुने लगी !

तभी वो बोली -आप कौन हैं ?
तब रुक्मणी ने अपना परिचय दिया और आने का कारण बताया...
तब वो बोली- मैं तो राधा जी की दासी हूँ।
राधाजी तो सात द्वार के बाद आपको मिलेंगी !!

रुक्मणी ने सातो द्वार पार किये...और,
हर द्वार पर एक से एक सुन्दर और तेजवान दासी को देख सोच रही थी क़ि-
अगर उनकी दासियाँ इतनी रूपवान हैं...तो,राधारानी स्वयं कैसी होंगी ?
सोचते हुए राधाजी के कक्ष में पहुंची...
कक्ष में राधा जी को देखा-अत्यंत रूपवान तेजस्वी जिसका मुख सूर्य से भी तेज चमक रहा था।
रुक्मणी सहसा ही उनके चरणों में गिर पड़ी...
पर,
ये क्या राधा जी के पुरे शरीर पर तो छाले पड़े हुए है !
रुक्मणी ने पूछा-देवी आपके शरीर पे ये छाले कैसे ?
तब राधा जी ने कहा-देवी !
कल आपने कृष्णजी को जो दूध दिया...वो ज्यदा गरम था !
जिससे उनके ह्रदय पर छाले पड गए...और,उनके ह्रदय में तो सदैव मेरा ही वास होता है..!!

इसलिए कहा जाता है-
बसना हो तो...'ह्रदय' में बसो किसी के..!
'दिमाग' में तो..लोग खुद ही बसा लेते है..!!

❄❄❄❄❄❄❄

╔══════════════════╗

║ प्रेम से कहिये जय श्री राधे ║

╚══════════════════

ये sms अपने जीवन के अच्छे दोस्तों को भेजो, मुझे भी करना अगर मैं हूँ तो? अगर 6 sms आपको वापिस आये तो

U r so lucky...........

6>=মোবাইলের বিস্তারিত জানতে V V Imp কাজের

মোবাইলের বিস্তারিত জানতে V V Imp কাজের 


 
.
इमरजेंसी नंबर ---
दुनिया भर में मोबाइल का इमरजेंसी नंबर 112 है ।

সম্পূর্ণ ভারতের ইমার্জেন্সি নম্বর ::---112 

মোবাইল নেট ওয়ার্কের বাইরে থাকলেও এই 112 দ্বারা ঐস্থানের নেটওয়ার্ক সার্চ করা যাবে 


*अगर आप मोबाइल की कवरेज एरिया से बाहर हैं तो 112 नंबर द्वारा आप उस क्षेत्र के नेटवर्क को सर्च कर लें। *ख़ास बात यह है कि यह नंबर तब भी काम करता है जब आपका की पैड लॉक हो।

*मोबाइल जब बैटरी लो दिखाए और उस दौरान जरूरी कॉल करनी हो, ऐसे में आप *3370# डायल करें । 
*आपका मोबाइल फिर से चालू हो जायेगा और आपका सेलफोन बैटरी में 50 प्रतिशत का इजाफा दिखायेगा। 
*मोबाइल का यह रिजर्व दोबारा चार्ज हो जायेगा जब आप अगली बार मोबाइल को हमेशा की तरह चार्ज करेंगे।
.
*मोबाइल चोरी होने पर---
मोबाइल फोन चोरी होने की स्थिति में सबसे पहले जरूरत होती है, फोन को निष्क्रिय करने की ताकि चोर उसका दुरुपयोग न कर सके । अपने फोन के सीरियल नंबर (IMEI) को चेक करने के लिए *#06# दबाएँ । इसे दबाते ही आपकी स्क्रीन पर 15 डिजिट का कोड नंबर आयेगा। इसे नोट कर लें और किसी सुरक्षित स्थान पर रखें। जब आपका फोन खो जाए उस दौरान अपने सर्विस प्रोवाइडर को ये कोड देंगे तो वह आपके हैण्ड सेट को ब्लोक कर देगा।
#Mobile
कार की चाभी खोने पर ---
अगर आपकी कार की रिमोट की लेस इंट्री है। और गलती से आपकी चाभी कार में बंद रह गयी है। और दूसरी चाभी घर पर है। तो आपका मोबाइल काम आ सकता है। घर में किसी व्यक्ति के मोबाइल फोन पर कॉल करें। घर में बैठे व्यक्ति से कहें कि वह अपने मोबाइल को होल्ड रखकर कार की चाभी के पास ले जाएँ और चाभी के अनलॉक बटन को दबाये। साथ ही आप अपने मोबाइल फोन को कार के दरवाजे के पास रखें....। दरवाजा खुल जायेगा।
है न विचित्र किन्तु सत्य......!!!
अधिक से अधिक शेयर करें।
एंड्राइड मोबाइल यूजर के काम के कोड
1. Phone Information, Usage and Battery – *#*#4636#*#*
2. IMEI Number – *#06#
3. Enter Service Menu On Newer Phones – *#0*#
4. Detailed Camera Information –*#*#34971539#*#*
5. Backup All Media Files –*#*#273282*255*663282*#*#*
6. Wireless LAN Test –*#*#232339#*#*
7. Enable Test Mode for Service –*#*#197328640#*#*
8. Back-light Test – *#*#0842#*#*
9. Test the Touchscreen –*#*#2664#*#*
10. Vibration Test –*#*#0842#*#*
11. FTA Software Version –*#*#1111#*#*
12. Complete Software and Hardware Info –*#12580*369#
13. Diagnostic Configuration –*#9090#
14. USB Logging Control –*#872564#
15. System Dump Mode –*#9900#
16. HSDPA/HSUPA Control Menu –*#301279#
17. View Phone Lock Status –*#7465625#
18. Reset the Data Partition to Factory State – *#*#7780#*#*
बड़े काम की बातें और कोड है इसलिए शेयर करे और दुसरो को भी बताये !

5>=कृष्ण अर्जुन एवं निर्धन ब्राह्मण

कृष्ण अर्जुन एवं निर्धन ब्राह्मण
**************************************
एक बार श्री कृष्ण और अर्जुन भ्रमण पर निकले तो उन्होंने मार्ग में एक निर्धन ब्राहमण को भिक्षा मागते देखा..
अर्जुन को उस पर दया आ गयी और उन्होंने उस ब्राहमण को स्वर्ण मुद्राओ से भरी एक पोटली दे दी।
जिसे पाकर ब्राहमण प्रसन्नता पूर्वक अपने सुखद भविष्य के सुन्दर स्वप्न देखता हुआ घर लौट चला।
किन्तु उसका दुर्भाग्य उसके साथ चल रहा था, राह में एक लुटेरे ने उससे वो पोटली छीन ली।
ब्राहमण दुखी होकर फिर से भिक्षावृत्ति में लग गया।अगले दिन फिर अर्जुन की दृष्टि जब उस ब्राहमण पर पड़ी तो उन्होंने उससे इसका कारण पूछा।
ब्राहमण ने सारा विवरण अर्जुन को बता दिया, ब्राहमण की व्यथा सुनकर अर्जुन को फिर से उस पर दया आ गयी अर्जुन ने विचार किया और इस बार उन्होंने ब्राहमण को मूल्यवान एक माणिक दिया।
ब्राहमण उसे लेकर घर पंहुचा उसके घर में एक पुराना घड़ा था जो बहुत समय से प्रयोग नहीं किया गया था,ब्राह्मण ने चोरी होने के भय से माणिक उस घड़े में छुपा दिया।
किन्तु उसका दुर्भाग्य, दिन भर का थका मांदा होने के कारण उसे नींद आ गयी, इस बीच ब्राहमण की स्त्री नदी में जल लेने चली गयी किन्तु मार्ग में ही उसका घड़ा टूट गया, उसने सोंचा, घर में जो पुराना घड़ा पड़ा है उसे ले आती हूँ, ऐसा विचार कर वह घर लौटी और उस पुराने घड़े को ले कर चली गई और जैसे ही उसने घड़े को नदी में डुबोया वह माणिक भी जल की धारा के साथ बह गया।
ब्राहमण को जब यह बात पता चली तो अपने भाग्य को कोसता हुआ वह फिर भिक्षावृत्ति में लग गया।
अर्जुन और श्री कृष्ण ने जब फिर उसे इस दरिद्र अवस्था में देखा तो जाकर उसका कारण पूंछा।
सारा वृतांत सुनकर अर्जुन को बड़ी हताशा हुई और मन ही मन सोचने लगे इस अभागे ब्राहमण के जीवन में कभी सुख नहीं आ सकता।
अब यहाँ से प्रभु की लीला प्रारंभ हुई।उन्होंने उस ब्राहमण को दो पैसे दान में दिए।
तब अर्जुन ने उनसे पुछा “प्रभु मेरी दी मुद्राए और माणिक भी इस अभागे की दरिद्रता नहीं मिटा सके तो इन दो पैसो से इसका क्या होगा” ?
यह सुनकर प्रभु बस मुस्कुरा भर दिए और अर्जुन से उस ब्राहमण के पीछे जाने को कहा।
रास्ते में ब्राहमण सोचता हुआ जा रहा था कि "दो पैसो से तो एक व्यक्ति के लिए भी भोजन नहीं आएगा प्रभु ने उसे इतना तुच्छ दान क्यों दिया ? प्रभु की यह कैसी लीला है "?
ऐसा विचार करता हुआ वह चला जा रहा था उसकी दृष्टि एक मछुवारे पर पड़ी, उसने देखा कि मछुवारे के जाल में एक मछली फँसी है, और वह छूटने के लिए तड़प रही है ।
ब्राहमण को उस मछली पर दया आ गयी। उसने सोचा"इन दो पैसो से पेट की आग तो बुझेगी नहीं।क्यों? न इस मछली के प्राण ही बचा लिए जाये"।
यह सोचकर उसने दो पैसो में उस मछली का सौदा कर लिया और मछली को अपने कमंडल में डाल लिया। कमंडल में जल भरा और मछली को नदी में छोड़ने चल पड़ा।
तभी मछली के मुख से कुछ निकला।उस निर्धन ब्राह्मण ने देखा ,वह वही माणिक था जो उसने घड़े में छुपाया था।
ब्राहमण प्रसन्नता के मारे चिल्लाने लगा “मिल गया, मिल गया ”..!!!
तभी भाग्यवश वह लुटेरा भी वहाँ से गुजर रहा था जिसने ब्राहमण की मुद्राये लूटी थी।
उसने ब्राह्मण को चिल्लाते हुए सुना “ मिल गया मिल गया ” लुटेरा भयभीत हो गया। उसने सोंचा कि ब्राहमण उसे पहचान गया है और इसीलिए चिल्ला रहा है, अब जाकर राजदरबार में उसकी शिकायत करेगा।
इससे डरकर वह ब्राहमण से रोते हुए क्षमा मांगने लगा। और उससे लूटी हुई सारी मुद्राये भी उसे वापस कर दी।
यह देख अर्जुन प्रभु के आगे नतमस्तक हुए बिना नहीं रह सके।
अर्जुन बोले,प्रभु यह कैसी लीला है? जो कार्य थैली भर स्वर्ण मुद्राएँ और मूल्यवान माणिक नहीं कर सका वह आपके दो पैसो ने कर दिखाया।
श्री कृष्णा ने कहा “अर्जुन यह अपनी सोंच का अंतर है, जब तुमने उस निर्धन को थैली भर स्वर्ण मुद्राएँ और मूल्यवान माणिक दिया तब उसने मात्र अपने सुख के विषय में सोचा। किन्तु जब मैनें उसको दो पैसे दिए, तब उसने दूसरे के दुःख के विषय में सोचा। इसलिए हे अर्जुन-सत्य तो यह है कि, जब आप दूसरो के दुःख के विषय में सोंचते है, जब आप दूसरे का भला कर रहे होते हैं, तब आप ईश्वर का कार्य कर रहे होते हैं, और तब ईश्वर आपके साथ होते हैं।
जय श्रीकृष्णकी

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4>=कामाख्या धाम का प्रसिद्ध अंबुवासी मेला

कामाख्या धाम का प्रसिद्ध अंबुवासी मेला
जिस प्रकार उत्तर भारत में कुंभ महापर्व का महत्व माना जाता है, ठीक उसी प्रकार उससे भी श्रेष्ठ इस आद्यशक्ति के अम्बूवाची पर्व का महत्व है। इसके अंतर्गत विभिन्न प्रकार की दिव्य आलौकिक शक्तियों का अर्जन तंत्र-मंत्र में पारंगत साधक अपनी-अपनी मंत्र-शक्तियों को पुरश्चरण अनुष्ठान कर स्थिर रखते हैं। इस पर्व में मां भगवती के रजस्वला होने से पूर्व गर्भगृह स्थित महामुद्रा पर सफेद वस्त्र चढ़ाये जाते हैं, जो कि रक्तवर्ण हो जाते हैं।

मंदिर के पुजारियों द्वारा ये वस्त्र प्रसाद के रूप में श्रद्धालु भक्तों में विशेष रूप से वितरित किये जाते हैं। इस पर्व पर भारत ही नहीं बल्कि बंगलादेश, तिब्बत और अफ्रीका जैसे देशों के तंत्र साधक यहां आकर अपनी साधना के सर्वोच्च शिखर को प्राप्त करते हैं। वाममार्ग साधना का तो यह सर्वोच्च पीठ स्थल है। मछन्दरनाथ, गोरखनाथ, लोनाचमारी, ईस्माइलजोगी इत्यादि तंत्र साधक भी सांवर तंत्र में अपना यहीं स्थान बनाकर अमर हो गये हैं
कामख्या देवी मंदिर गुवाहती के दर्शन फोटो

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3>=শিক্ষণীয় গল্প॥----(1--11)

★1>॥শিক্ষণীয় গল্প॥**..*..**
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একদা গাধা ও শিয়াল বনের মাঝে ঝগড়া শুরু করল।
গাধা বলল - "ঘাস হলুদ..!!!"
শিয়াল বলল - "না, ঘাস সবুজ..!!!"
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যখন এ বিতর্ক চরম আকার ধারন করলো, তারা দু জন বিচারের জন্য বনের রাজা সিংহকে বিচারক নির্ধারণ করল।
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তখন সিংহ শিয়াল কে পূর্ণ একমাস বন্দী রাখার এবং গাধাকে মুক্তির আদেশ করল।
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শিয়াল সিংহকে প্রশ্ন করল - "এটা কি ন্যায় বিচার..? ঘাস কি সবুজ নয়..!!!"
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সিংহ উত্তর দিল - "ঘাস অবশ্যই সবুজ...কিন্তু আমি তোকে বন্দী করার আদেশ করেছি...কেননা তুই গাধার সাথে তর্ক করেছিস..!!!!!"
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*** (আজ কাল আমরা অনেকেই অযথা তর্কে জড়িয়ে পড়ি, এমন মানুষের সাথে আমরা তর্কে লিপ্ত হই যাদের ব্যাপারে আমরা জানি, পৃথিবীর সকল প্রমানও যদি তার মতবাদের বিপক্ষে দাড় করাই তার পরও সে তা মেনে নেবে না।)

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★2>लोहा नरम होकर औजार बन जाता है, सोना नरम

होकर जेवर बन जाता है ! मिट्टी नरम होकर खेत बन

जाती है, आटा नरम होता है तो रोटी बन जाती है !

ठीक इसी तरह अगर इंसान भी नरम हो जाये

तो लोगो की दिलों मे अपनी जगह बना लेता है !

सदैव बेहतर की उम्मीद करे !

"खुश रहिये मुस्कुराते रहिये !!
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3>- माचिस किसी दूसरी चीज
को जलाने से पहले खुद
को जलाती हैं..!
गुस्सा भी एक माचिस की तरह है..!
यह दुसरो को बरबाद करने से पहले
खुद को बरबाद करता है...

4>- आज का कठोर व कङवा सत्य !!
चार रिश्तेदार एक दिशा में
तब ही चलते हैं ,
जब पांचवा कंधे पर हो...

5> कीचड़ में पैर फंस जाये तो नल के पास जाना चाहिए
मगर,
नल को देखकर कीचड़ में नही जाना चाहिए,
इसी प्रकार...
जिन्दगी में बुरा समय आ जाये
तो...
पैसों का उपयोग करना चाहिए
मगर...
पैसों को देखकर बुरे रास्ते पर नही जाना चाहिए...

6> रिश्तों की बगिया में एक रिश्ता नीम के पेड़ जैसा भी रखना,
जो सीख भले ही कड़वी देता हो पर
तकलीफ में मरहम भी बनता है...

7>- परिवर्तन से डरना और संघर्ष से कतराना,
मनुष्य की सबसे बड़ी कायरता है...

8>- जीवन का सबसे बड़ा गुरु वक्त होता है,
क्योंकि जो वक्त सिखाता है वो कोई नहीं सीखा सकता...

9>- बहुत ही सुन्दर वर्णन है-
मस्तक को थोड़ा झुकाकर देखिए....अभिमान मर जाएगा
आँखें को थोड़ा भिगा कर देखिए.....पत्थर दिल पिघल जाएगा
दांतों को आराम देकर देखिए.........स्वास्थ्य सुधर जाएगा
जिव्हा पर विराम लगा कर देखिए.....क्लेश का कारवाँ गुज़र जाएगा
इच्छाओं को थोड़ा घटाकर देखिए......खुशियों का संसार नज़र आएगा...

10>- पूरी जिंदगी हम इसी बात में गुजार देते हैं कि "चार लोग क्या कहेंगे",
और अंत में चार लोग बस यही कहते हैं कि "राम नाम सत्य है
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11>अच्छे बात 
*जिस दिन हमारी मोत होती है, हमारा पैसा बैंक में ही रहा जाता है।
*जब हम जिंदा होते हैं तो हमें लगता है कि हमारे पास खच॔ करने को पया॔प्त धन नहीं है।
**जब हम चले जाते है तब भी बहुत सा धन बिना खच॔ हुये बच जाता है।
**एक चीनी बादशाह की मोत हुई। वो अपनी विधवा के लिये बैंक में 1.9 मिलियन डालर छोड़ कर गया। विधवा ने जवान नोकर से शादी कर ली। उस नोकर ने कहा -"मैं हमेशा सोचता था कि मैं अपने मालिक के लिये काम करता हूँ अब समझ आया कि वो हमेशा मेरे लिये काम करता था।"
सीख?
ज्यादा जरूरी है कि अधिक धन अज॔न कि बजाय अधिक जिया जाय।
• अच्छे व स्वस्थ शरीर के लिये प्रयास करिये।
• मँहगे फ़ोन के 70% फंक्शन अनोपयोगी रहते है।
• मँहगी कार की 70% गति का उपयोग नहीं हो पाता।
• आलीशान मकानो का 70% हिस्सा खाली रहता है।
• पूरी अलमारी के 70% कपड़े पड़े रहते हैं।
• पुरी जिंदगी की कमाई का 70% दूसरो के उपयोग के लिये छूट जाता है।
• 70% गुणो का उपयोग नहीं हो पाता
तो 30% का पूण॔ उपयोग कैसे हो
• स्वस्थ होने पर भी निरंतर चैक अप करायें।
• प्यासे न होने पर भी अधिक पानी पियें।
• जब भी संभव हो, अपना अहं त्यागें ।
• शक्तिशाली होने पर भी सरल रहेँ।
• धनी न होने पर भी परिपूण॔ रहें।
बेहतर जीवन जीयें !!!
💮💮💮💮
काबू में रखें - प्रार्थना के वक़्त अपने दिल को,
काबू में रखें - खाना खाते समय पेट को,
काबू में रखें - किसी के घर जाएं तो आँखों को,
काबू में रखें - महफ़िल मे जाएं तो ज़बान को,
काबू में रखें - पराया धन देखें तो लालच को,
💮💮💮
भूल जाएं - अपनी नेकियों को,
भूल जाएं - दूसरों की गलतियों को,
भूल जाएं - अतीत के कड़वे संस्मरणों को,
💮💮💮
छोड दें - दूसरों को नीचा दिखाना,
छोड दें - दूसरों की सफलता से जलना,
छोड दें - दूसरों के धन की चाह रखना,
छोड दें - दूसरों की चुगली करना,
छोड दें - दूसरों की सफलता पर दुखी होना,
💮💮💮💮
यदि आपके फ्रिज में खाना है, बदन पर कपड़े हैं, घर के ऊपर छत है और सोने के लिये जगह है,तो दुनिया के 75% लोगों से ज्यादा धनी हैं !!
यदि आपके पर्स में पैसे हैं और आप कुछ बदलाव के लिये कही भी जा सकते हैं जहाँ आप जाना चाहते हैं तो आप दुनिया के 18% धनी लोगों में शामिल हैं !!
यदि आप आज पूर्णतः स्वस्थ होकर जीवित हैं,तो आप उन लाखों लोगों की तुलना में खुशनसीब हैं जो इस हफ्ते जी भी न पायें !!
जीवन के मायने दुःखों की शिकायत करने में नहीं हैं,बल्कि हमारे निर्माता को धन्यवाद करने के अन्य हजारों कारणों में है!!!
यदि आप मैसेज को वाकइ पढ़ सकते हैं और समझ सकते हैं तो आप उन करोड़ों लोगों में खुशनसीब हैं जो देख नहीं सकते और पढ़ नहीं सकते !!
अगर आपको यह सन्देश बार बार मिले तो परेशान होनेकी बजाय आपको खुश होना चाहिए !
धन्यवाद... मैंने भेज दिया अब आपकी बाऱी है ।

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2>=रानी लक्ष्मी बाई

रानी लक्ष्मी बाई (जन्म: 19 नवम्बर 1835 – मृत्यु: 17 जून 1858)
लक्ष्मीबाई का बचपन का नाम मणिकर्णिका था परन्तु प्यार से सब उन्हें मनु कहकर पुकारते थे। मनु का जन्म वाराणसी जिले के भदैनी नामक नगर में 19 नवम्बर 1835 को हुआ था तथा उनकी माँ का नाम भागीरथीबाई तथा पिता का नाम मोरोपन्त तांबे था। मोरोपन्त एक मराठी थे और मराठा बाजीराव की सेवा में थे। माता भागीरथीबाई एक सुसंस्कृत, बुद्धिमान एवं धार्मिक महिला थीं। मनु ने बचपन में शास्त्रों की शिक्षा के साथ शस्त्रों की शिक्षा भी ली। सन् 1842 में उनका विवाह झाँसी के मराठा शासित राजा गंगाधर राव निम्बालकर के साथ हुआ और वे झाँसी की रानी बनीं। विवाह के बाद उनका नाम लक्ष्मीबाई रखा गया। 21 नवम्बर 1853 को राजा गंगाधर राव की मृत्यु हो गयी। झाँसी 1857 के संग्राम का एक प्रमुख केन्द्र बन गया जहाँ हिंसा भड़क उठी। रानी लक्ष्मीबाई ने झाँसी की सुरक्षा को सुदृढ़ करना शुरू कर दिया और एक स्वयंसेवक सेना का गठन प्रारम्भ किया। इस सेना में महिलाओं की भर्ती की गयी और उन्हें युद्ध का प्रशिक्षण दिया गया। साधारण जनता ने भी इस संग्राम में सहयोग दिया।
1857 के प्रथम भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम की वीरांगना थीं जिन्होंने मात्र 23 वर्ष की आयु में ब्रिटिश साम्राज्य की सेना से संग्राम किया और रणक्षेत्र में वीरगति प्राप्त की किन्तु जीते जी अंग्रेजों को अपनी झाँसी पर कब्जा नहीं करने दिया।
पतंजलि योगपीठ परिवार की ओर से झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई जी की पुण्यतिथि पर उन्हें भावपूर्ण स्मरण

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किसी पुण्यात्मा को जने पर बी आपक मन बी पुण्य हो जता है इसी लिये आत्मा को शुद्ध रके - जय जननी,जय माँ भारती-

*महारानी लक्ष्मीबाई इतिहास*

पूरा नाम – राणी लक्ष्मीबाई गंगाधरराव.
जन्म – 19 नवम्बर, 1828.
जन्मस्थान – वाराणसी.
पिता – श्री. मोरोपन्त.
माता – भागीरथी
शिक्षा – मल्लविद्या, घुसडवारी और शत्रविद्याए सीखी.
विवाह – राजा गंगाधरराव के साथ.

लक्ष्मीबाई उर्फ़ झाँसी की रानी मराठा शासित राज्य झाँसी की रानी थी, जो उत्तर-मध्य भारत में स्थित है. रानी लक्ष्मीबाई 1857 के प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की वीरांगना थी जिन्होंने अल्पायु में ही ब्रिटिश साम्राज्य से संग्राम किया था.

लक्ष्मीबाई का जन्म वाराणसी जिले के भदैनी नमक नगर में 19 नवम्बर 1828 में हुआ था. उनके बचपन का नाम मणिकर्णिका था परन्तु प्यार से उसे मनु कहा जाता था. मनु की माँ का नाम भागीरथीबाई तथा पिता का नाम मोरोपंत तांबे था. मनु के माता-पिता महाराष्ट्र से झाँसी में आये थे. मनु जब सिर्फ चार वर्ष की थी तभी उनकी माँ की मृत्यु हो गयी थी. मोरोपंत एक मराठी थे और मराठा बाजीराव की सेवा में थे. मनु के माँ की मृत्यु के बाद घर में मनु की देखभाल के लिये कोई नही था इसलिये मनु के पिता उसे अपने साथ पेशवा के दरबार में ले गये, जहा चंचल एवं सुन्दर मनु ने सबका मन मोह लिया था. मनु ने बचपन में ही अपनी प्राथमिक शिक्षा घर से ही पूरी की थी और साथ ही मनु ने बचपन में शस्त्रों की शिक्षा भी ग्रहण की थी.

मई 1842 में 8 वर्ष की उम्र में उनका विवाह झाँसी के मराठा शासित राजा गंगाधर राव नेवालकर के साथ हुआ और वह झाँसी की रानी बनी. विवाह के बाद उनका नाम लक्ष्मीबाई रखा गया.1851 में रानी लक्ष्मीबाई ने एक पुत्र को जन्म दिया जिसका नाम दामोदर राव रखा गया था लेकिन चार महीने की आयु में ही उसकी मृत्यु हो गयी. बाद में महाराजा ने एक पुत्र को दत्तक ले लिया, जो गंगाधर राव के ही भाई का बेटा था, बाद में उस दत्तक लिए हुए बेटे का नाम बदलकर महाराजा की मृत्यु से पहले दामोदर राव रखा गया था. लेकीन ब्रिटिश राज को यह मंजूर नही था इसलिए उन्होंने दामोदर के खिलाफ मुकदमा दायर कर दिया, उस मुक़दमे में दोनों ही तरफ से बहोत बहस हुई लेकिन बाद में इसे ख़ारिज कर दिया गया. कंपनी शासन उनका राज्य हड़प लेना चाहता था. रानी लक्ष्मीबाई ने जितने दिन भी शासनसूत्र संभाला वो अत्याधिक सुझबुझ के साथ प्रजा के लिए कल्याण कार्य करती रही. इसलिए वो अपनी प्रजा की स्नेहभाजन बन गई थी. तत्पश्चात ब्रिटिश अधिकारियो ने राज्य का खजाना जब्त कर लिया और उनके पति के क़र्ज़ को रानी के सालाना खर्च में से काटने का फरमान जारी कर दिया गया. इसके परिणामस्वरूप रानी को झाँसी का किला छोड़ कर झाँसी के रानीमहल में जाना पड़ा. मार्च 1854 को रानी लक्ष्मीबाई को किले को छोड़ते समय 60000 रुपये और सालाना 5000 रुपये दिए जाने का आदेश दिया. लेकिन रानी लक्ष्मीबाई ने हिम्मत नही हरी और उन्होंने हर हाल में झाँसी राज्य की रक्षा करने का निश्चय किया. ब्रिटिश अधिकारी अधिकतर उन्हें झाँसी की रानी कहकर ही बुलाते थे.

घुड़सवारी करने में रानी लक्ष्मीबाई बचपन से ही निपुण थी. उनके पास बहोत से जाबाज़ घोड़े भी थे जिनमे उनके पसंदीदा सारंगी, पवन और बादल भी शामिल है. जिसमे परम्पराओ और इतिहास के अनुसार 1858 के समय किले से भागते समय बादल ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. बाद में रानी महल, जिसमे रानी लक्ष्मीबाई रहती थी वह एक म्यूजियम में बदल गया था. जिसमे 9 से 12 वी शताब्दी की पुरानी पुरातात्विक चीजो का समावेश किया गया है.

उनकी जीवनी के अनुसार ऐसा दावा किया गया था की दामोदर राव उनकी सेना में ही एक था, और उसीने ग्वालियर का युद्ध लड़ा था, ग्वालियर के युद्ध में वह अपने सभी सैनिको के साथ वीरता से लड़ा था. जिसमेतात्या टोपे और रानी की संयुक्त सेनाओ ने ग्वालियर के विद्रोही सैनिको की मदद से ग्वालियर के एक किले पर कब्ज़ा कर लिया. 17 जुन 1858 को ग्वालियर के पास कोटा की सराय में ब्रिटिश सेना से लड़ते-लड़ते रानी लक्ष्मीबाई ने वीरगति प्राप्त की.

भारतीय वसुंधरा को गौरवान्वित करने वाली झाँसी की रानी एक आदर्श वीरांगना थी. सच्चा वीर कभी आपत्तियों से नही घबराता. उसका लक्ष्य हमेशा उदार और उच्च होता है. वह सदैव आत्मविश्वासी, स्वाभिमानी और धर्मनिष्ट होता है. और ऐसी ही वीरांगना झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई थी.
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1>Interesting meaning of 'good morning'

Interesting meaning of 'good morning'
( We all say Good Morning to others. Do you know the meaning of "GOOD MORNING" ?

G Get up.
O Open your heart.
O Open your mind.
D Dedicate your day to God.

M Meditate on Gods word.
O Optimise your faith & hope.
R Rebuke all evils.
N Never doubt Gods love.
I Inspire someone
N Nothing should scare you .
G Go out with joy.

So, I say GOOD MORNING!

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