17>||. अपने भीतर श्री राम // हनुमान ||
हमें अपने भीतर भगवान श्री राम/भगवान श्रीकृष्ण /पवनपुत्र हनुमान जी को गढ़ना है ।
ऐसे देवता के दिव्य गुणों से हम अपने हृदय में स्थित राक्षसों का नाश कर सकते हैं एवं शुभ शक्ति की प्रकाश की उपलब्धि करसकते है।
तभी अंदर में शुद्ध चेतना की जागृत होंगे और मनचाहे फल प्राप्त होंगे।
कुछ पानेके लिए कुछ कर्म करना होंगे।
यदि आप तालाब में स्नान करना चाहते हैं, तो आपको तालाब में उतरना होगा।
ईश्वर से कुछ पानेके लिए ईश्वर को हृदय में गढ़ना/स्थापित किया जाना चाहिए।
अतः जबतक हृदयमे ईश्वर को स्थापना नहीं करसकते है, तब तक जीवन कठिन है ।
मनुष्य जबतक ईश्वर को हृदय में स्थान नहीं देते है तब तक जीवन मूल्य हीन।
अतः आपने को पहचानो, अपनेको जानो,
मनकों स्थिर करो और हृदय में देखो।
अपने आपको पूछो कि आप कौन है!
एक स्निग्ध स्पंदन अनुभ करो।
हर साँस में ध्यान दे " ॐ " की स्पंदन नाभि मूल से उत्पन्न होकर अनंत में मिलकर फिर वापस नाभि मूल में ही लय होते रहते है।
ए एक बृहत पक्रिया ।
उसमें ध्यान देना अभी जरूरी नहीं ।अभी सिर्फ मनकों एकाग्र करते हुएं मंत्र की जप करो।